Anti-Smoking

शराब और नशीली दवाओं के दुरुपयोग और समाज पर इसके प्रभाव

नसा एक घातक बीमारी है या यों कहिये नसा एक आदत है ये आदत बुरी भी हो सकती है और अच्छी भी, अच्छी आदत जैसे किसी को पड़ने का नसा है , किसी को खेलने का नसा है , किसी को सिंगर बनना है, किसी को प्लांटेशन का शौक है ,कोई दोसरो की हेल्प करना चाहता है वही दूसरी ओर बुरी आदत जैसे गुटका, तम्बाकू ,सिगरेट, शराब का नशा करने वाले सोयम तो परेशान रहते है साथ में उनके परिवार वाले और आस पास समाज के लोग भी परेशान रहते है इसका नुकसान इस हद तक होता है की इसे करने वाले तो बर्बाद होते है साथ में जो इनके आस पास रहते है वाे भी दुखी और हतास रहते है

माँ बाप अपने बच्चो को सफलता की ऊंचाइयों को छूते हुए देकना चाहते है वे अपने बच्चो के लिए सोयम कस्ट में रहकर उनके बेहतर जीवन के लिए अपने कठिन परिश्रम से कमाई की हुए पैसो को अपने बच्चो के जरुरत के लिए खुद की इच्छाओ को दबा देते है और बदले में हम क्या देते है हतासा , निराशा, हाई ब्लड प्रेसर , हार्ट अटैक ,बीमारी,चिंता तो आप ही बताएं क्या यह सही है।

क्या हमारा जीवन इसी लिए है। क्या हम अपने जीवन को सार्थक क्या हम ऐसे ही अपना जीवन जियेंगे , अगर नहीं तो आईये इस समस्या के समाधान के ओर जैसे जब हमें शराब पिने का मन करे तो हम अपने संसाधन के अनुसार सरबत , नीबू पानी पी सकते है। अरे कुछ नहीं तो थोड़े से पानी में नमक और चीनी मिलाकर पि सकते हैं’


इससे हमारी सेहत तो सुधरेगी ही साथ ही हमारे माता पिता और दूसरे घर वाले भी खुश रहेंगे। तम्बाकू , गुटका और सिगरेट का सेवन करने से मुँह का कैंसर, फेफड़ा में खराबी

Ravi Rai
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